किसी के वास्ते जज़्बात मर जाए तो क्या किया जाए. हमारी ही नज़र से कोई गिर जाए तो क्या किया जाए. जिसे हमने था समझा अपनी मंजिल के सफर का हमराही. अगर वो साथ अपना छोड़ कर जाए तो क्या किया जाए. کیسی کے واسطے جذبات میں جائے تو کیا کیا جائے، ہماری ہی نظر سے کوئی گر جائے تو کیا کیا جائے، جیسے ہمنے سمجھا اپنی منزل کے سفر کا ہمراہی، اگر وہ ساتھ اپنا چھوڑ کے جائے تو کیا کیا جائے۔ -© Anshu Pandey
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Showing posts from June, 2020
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धोखा से पाई सफलता क्या सच में सफलता है? चांद बुलंदी पे है फिर भी दाग़ तो दिखता है. रोज़ उसे ही लिखा मैंने कश्मकशीं देखों. इश्क़ मिरा वो किसी ओ को ही समझता हैं. इश्क़ को मैंने जवानी का रोग ग़लत समझा. बूढ़ा है इक मेरे महफ़िल मे आह जो भरता है. मिटते नहीं यार सच्चे दिल से इश्क़ ओ नफ़रत. ज़िंदा यहां से तो जाने के बाद भी रहता हैं. कोई किसी के बिना मरता तो नहीं है लेकिन. आत्मा मर जाती ये कोई - कोई ही कहता हैं. एक ही कमरे में मैं हूं ओ मेरी ही नाकामी. जोरों से रो रहा हूं ओ वो मुझ पे ही हँसता हैं. دھوکا سے پائی سپھلتا کیا سچ میں سپھلتا ہے۔ چند بلندی پے ہے پھر بھی داغ ت...